Wednesday, October 9, 2019

डॉ.नीलम बाला,सचिव एडब्ल्यूबीआई को "यू.पी.रत्न-2019" अवार्ड


लखनऊ (उत्तर प्रदेश); 6 अक्टूबर 2019: डॉ. आर.बी. चौधरी

उत्तर प्रदेश की राजधानी  लखनऊ में आयोजित नेशनल इंटेलेक्चुअल  सोसाइटी के तत्वावधान में  एक   राष्ट्रीय  कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया  था जिसमें आयोजन समिति  ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया (एडब्ल्यूबीआई)  सचिव ,डॉ. नीलम बाला, सचिव -को  "यूपी रत्न - 2019"  अवार्ड से  सम्मानित किया.यह सम्मान पहली  बार उत्तर प्रदेश के किसी  महिला पशु चिकित्सक को उल्लेखनीय पशु चिकित्सा सेवा के लिए सम्मानित किया गया है.
  
यूपी आइकन अवार्ड, 2019 पशु चिकित्सा , अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और विकासात्मक गतिविधियों  पर  उनके समर्पित जीवन एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है। डॉ. बाला पशुचिकित्सा आनुवंशिकी और प्रजनन में विशेष  योग्यता रखने वाली महिला है  और एडब्ल्यूबीआई  इतिहास की पहली पशु चिकित्सक डॉक्टरेट- प्रशासक हैं। वर्तमान में डॉ. नीलम केंद्र सरकार में  गत 4अक्टूबर से  आगामी 4 वर्षों तक प्रतिनियुक्ति पर हैं। वह  केंद्रीय परियोजनाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश  को सबसे समृद्ध बनाने के लिए पशु कल्याण पर  राज्य का समर्थन करने के लिए हमेशा आगे रहती हैं.  अभी कुछ दिन पूर्व के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ एक  बैठक में  उन्हें पशु कल्याण परियोजना के संचालन के मामले में बातचीत की तो मुख्यमंत्री ने उन्हें योजनाओं की सफलता के लिए पूर्ण समर्थन देने का वादा किया.

यहां यह बता दें कि डॉ. नीलम बाला उत्तर प्रदेश में पशुपालन विभाग में एक लोकप्रिय पशु चिकित्सक हैं. उत्तर प्रदेश में वह  विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं जैसे- एस्टेट ऑफिसर, नोडल ऑफिसर (ट्रेनिंग) और पशुपालन विभाग उत्तर प्रदेश सरकार में विभिन्न समितियों के सदस्य के रूप में  भी  काम किया है और उन्होंने सोडिक लैंड प्रोजेक्ट- III, एक विश्व बैंक परियोजना के आजीविका  सहयोग एवं समर्थन उद्देश्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.  वैसे डॉ. बाला हरियाणा में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से पशु चिकित्सा ग्रैजुएट एवं पोस्ट ग्रैजुएट होने के साथ-साथ उसी विश्वविद्यालय से  पशु आनुवंशिकी और प्रजनन में पीएच.डी. है. वह आईआईएम, आईवीआरआई, एमएएनएजीइ, एनआईडीएम, डब्लूआईआई,  आईएएसआरआई,एनआईआरडी, सीपीडीओ में सामान्य प्रबंधन, शासन और पशु चिकित्सा विज्ञान और पशु कल्याण से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी हैं. दुनिया भर में प्रकाशित होने वाले कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शोध प्रकाशनों में उनके शोध पत्र प्रकाशित हैं.  साथ ही साथ पशु स्वास्थ्य पर प्रशिक्षण कार्यक्रम पर आयोजित कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी फोर्ट कोलिन्स में भारत का प्रतिनिधित्व  भी कर चुकी हैं. ’इंटरनेशनल वन हेल्थ कांग्रेस मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया में पेपर प्रस्तुत किया है.

वह आइएएवीआर, आईएसवीयम, आईएसएजीबी, एलएसएआई सहित पशु विज्ञान से संबंधित कई संघों की सदस्य हैं. वह कई पत्रिकाओं के समीक्षक और कार्यकारी सदस्य भी हैं. वह सीडीआरआई, आईआईटीआर, एनबीआरआई सहित कई संस्थाओं की  सीपीसीएसईए  की नॉमिनी भी हैं. डॉ. नीलम बाला को उनके योगदान के लिए विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित किया गया है जिनमें से एक उल्लेखनीय महिला वेटरिनरी अवार्ड, सुल्तान अवार्ड, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम उत्कृष्टता पुरस्कार, राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार, युवा वैज्ञानिक पुरस्कार और भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय छात्रवृत्ति भी प्राप्त कर चुकी है.

डॉ. नीलम बाला विशेष रूप से निराश्रित जानवरों की बेहतर देख-भाल के लिए पशु कल्याण और उत्पन्न होने वाले अपराधों निवारण के लिए प्रयासरत हैं. वह सरकार, पशु प्रेमियों और जनता के बीच  जानवरों की देखभाल के एक सेतु निर्माण करने के लिए कार्यरत तथा देश में पशु क्रूरता निवारण के साथ साथ पशु कल्याण में महिला सशक्तिकरण के लिए बहुत उत्सुक है.अभी हाल में  नॉर्वे के बर्गन में आयोजित  होने वाले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था जहां पर  पशु कल्याण विषय पर उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया है.


************

Wednesday, October 2, 2019

उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग ने आम आदमी से सीधे संवाद साधा -आयोग का वेबसाइट लांच किया

 डॉ. आर. बी. चौधरी

हाइलाइट्स:

मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गांधी के ग्राम स्वराज का सपना साकार करेगा उत्तर प्रदेश.

# राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि गांधी जी और शाष्त्री जी की भावना का सम्मान स्वच्छता में योगदान और प्लास्टिक का बहिष्कार करके किया जा सकता है.

# आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर श्यामनंदन सिंह ने कहा कि गोसेवा आयोग की नवीनतम वेबसाइट से गोपालक अब ऑनलाइन अनुदान के लिए आवेदन कर सकेंगे.

2 अक्टूबर, 2019; लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

हात्मा गांधी की 151वीं जयंति पर उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने जनता को उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग की नवीनतम वेबसाइट का अनावरण गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर शहीद पथ पर स्थित अवध शिल्पग्राम में एक उत्पाद एक योजना के 10 दिवसीय प्रदर्शनी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के किसानों को खुशहाल बनाने और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए संकल्पबद्ध है। राज्य सरकार के सभी विभाग बापू के ग्राम स्वराज को साकार करने के लिए हर सम्भव कार्य कर रहे हैं।

इस अवसर पर आयोजन की मुख्य अतिथि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ढाई साल के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने अनेक योजनाओं के माध्यम से इतना काम किया है जितना पिछले 15 साल में भी नहीं हुआ। महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शाष्त्री की जयंति पर उनके सपने को साकार करने के लिए स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने में हमें हर संभव योगदान देना चाहिए। इस अवसर पर पंचायती राज विभाग, लघु उद्यम और खादी ग्रामोद्योग विभाग की कई योजनाओं के तहत श्रमिकों और उद्यमियों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमियों को अब लोन के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। महज 59 मिनट में लोन की सारी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इस आयोजन में मंच पर लघु उद्यम मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, खादी ग्रामोद्योग मंत्री चौधरी उदयभान, संस्कृति और पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी, मुख्य सचिव आर के तिवारी, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम नंदन सिंह, उपाध्यक्ष यशवन्त सिंह भी मौजूद थे।

उ.प्र गो सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर श्याम नन्दन सिंह ने बताया कि आयोग की नवीन वेबसाइट गो संरक्षण और संवर्धन के सम्बंध में सभी प्रकार के नवीन जानकारियां उपलब्ध हैं। उ.प्र. में आयोग देशी नस्ल के गोवंश के संरक्षण की दिशा में गोपालकों और गोशालाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी वेबसाइट में उपलब्ध करवाई गई है। इस वेबसाइट से सभी प्रकार की सरकारी योजनाओं, पंजीकृत गोशालाओं, सभी प्रकार के गोवंश की नस्लों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस वेबसाइट में अद्यतन उपलब्ध सभी अनुदेश, शासनादेश और योजनाओं का विवरण सुलभ है। प्रदेश भर में गो सेवा अश्रय स्थल, गोशालाओं या सरकारी विभागों से सम्बंधित किसी प्रकार की शिकायत भी ऑनलाइन करने की सुविधा वेबसाइट में उपलब्ध है। गोपालक उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग से सम्बन्धित सभी जानकारी upgosevaayog.in/ upgosvaayog.upsdc.gov.in पर हासिल की जा सकती है।

वेबसाइट के अनावरण के अवसर पर आयोग के सदस्य कृष्ण कुमार सिंह ‘भोले सिंह’, विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख सौरभ मिश्रा, गोवंश के संरक्षण और गोपालकों की आर्थिक स्थिति को सुधार के लिए नवाचारी प्रयास करने वाले विशेषज्ञों में डॉ. आनंद कुमार, डॉ. प्रतीक सचान, डॉ. संजय यादव, डॉ गंगवार, डॉ प्रमोद कुमार त्रिपाठी, डॉ उमाशंकर श्रीवास्तव, अमित आनंद, चन्दर कुमार, सुनील शाक्य, सुनील मिश्रा सहित आयोग से सम्बद्ध विभाग, पशुपालन विभाग, कृषि विभाग उद्यान विभाग, उद्यमिता विभाग, वैज्ञानिक, गोपालक, गो प्रेमी और अनेक संबधित विभागों के अधिकारी और भारी संख्या में पशु प्रेमी गोपालक तथा लखनऊ शहर के निवासी  मौजूद थे।

*****

Wednesday, September 18, 2019

SAMAST MAHAJAN - PRESS & MEDIA COVERAGE - TRAINING PROGRAMME (समस्त महाजन द्वारा आयोजित प्रशिक्षण शिविर का मीडिया कवरेज :6वां बैच : सितम्बर ,2019

समस्त महाजन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय गौशाला के प्रतिनिधि प्रशिक्षण शिविर संपन्न

पांच राज्यों से आए 300 गौशाला प्रतिनिधियों को वापसी में गौसेवा प्रोत्साहन हेतु चेक मिला -आगामी दिवाली तक गौशाला प्रतिनिधियों का राष्ट्रीय सम्मेलन राजस्थान में

पशु संदेश, 18 सितंबर ; धर्मज(गुजरात)
रिपोर्ट : डॉ आर बी चौधरी

LINK FOR DETAILED STORY : http://pashusandesh.com/samast-mahajan-camp-concluded

**************************************






समस्त महाजन द्वारा गौशाला के प्रतिनिधियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आरंभ

राजस्थान के साथ मे पांच राज्यों से आए 300 प्रतिभागी पंजीकृत - पशुपालन विभाग के बड़े अधिकारी भी शामिल हुए
16 सितंबर, 2019; परलाई सिरोही ( राजस्थान )
रिपोर्ट : डॉ आर बी चौधरी


***********************************





**********************
प्रेस विज्ञप्ति  

समस्त महाजन द्वारा  आयोजित तीन दिवसीय गौशाला के प्रतिनिधि प्रशिक्षण शिविर संपन्न - पांच राज्यों से आए 300  गौशाला प्रतिनिधियों को वापसी में  गौसेवा प्रोत्साहन हेतु चेक मिला -आगामी दिवाली तक गौशाला प्रतिनिधियों का राष्ट्रीय सम्मेलन राजस्थान में

********
रिपोर्ट : डॉ. आर.बी. चौधरी
(विज्ञान लेखक एवं पत्रकार,पूर्व मीडिया हेड एवं प्रधान संपादक, एडब्ल्यूबीआई,भारत सरकार)

18 सितंबर ; धर्मज(गुजरात)


गुजरात के बहुचर्चित गांव धर्मज  गांव मे आज समस्त महाजन का तीन दिवसीय गौशाला  प्रतिनिधि भ्रमण-प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ. समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश जयंतीलाल शाह ने बताया कि इस गौशाला प्रतिनिधि  भ्रमण -प्रशिक्षण कार्यक्रम का मूल मकसद यह रहा है देश के किसानों, पशुपालकों एवं गौशाला संचालकों  अपनी पारंपरिक  रहन -सहन एवं संस्कृति के अनुसार पशुओं की प्रबंधन करना,ताकि गौ संरक्षण-संवर्धन के लिए  गांव-घर में मौजूद संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीण व्यवस्था के  दायरे में रहकर गौशाला संचालित कर सकें  और उन्हें अन्य कहीं संसाधन-सुविधा खोजने न जाना पड़े. शाह ने बताया कि इस  भ्रमण - प्रशिक्षण अभियान में कुल 300 प्रशिक्षु शामिल हुए. अब तक समस्त महाजन द्वारा कुल पांच प्रशिक्षण आयोजित करके तकरीबन  3,500  गौशाला प्रतिनिधियों एवं पशु प्रेमियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है जिन्होंने अपने-अपने जिले में गौ संरक्षण -संवर्धन की एक कोशिश ही नहीं बल्कि गौ संरक्षण संवर्धन की  अभियान आरंभ की है, जो अनुकरणीय है.

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता  स्वयंसेवी संस्था - समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी  एवं  भारत सरकार के अधीन कार्यरत भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य गिरीश शाह ने बताया कि आज प्रशिक्षण के तीसरे दिन विभिन्न प्रदेशों से आए कुल 300 गौशाला प्रतिनिधियों को गुजरात के प्रख्यात धर्मज  गांव में उन्हें  गौशाला प्रबंधन के विशिष्ट कार्यों को दिखाया गया ताकि वह धर्मज गांव से प्रेरणा लें और अपनाएं. प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुरुआत फिलहाल राजस्थान के परलाई सिरोही में वर्ष 2011 में स्थापित  श्री सूरी प्रेम जीव रक्षा केंद्र से आरंभ की गई और वहां के  संचालन व्यवस्था का इतिहास बताया गया.इस गौशाला में पशुओं के गोदनामा  पद्धति पर इसकी शुरुआत की गई थी जो आज  उसी क्रम में  न केवल संचालित है बल्कि फलता- फूलता एक आधुनिक गौशाला बन गया है. इसी क्रम में  25 साल पुरानी  समाजसेवी के.पी. संघवी परिवार द्वारा  पूरी तरह से एक व्यक्ति द्वारा  संचालित सुमति जीव रक्षा केंद्र पर  पाले  जा रहे 10,000 गोवंश की बेहतरीन व्यवस्था  दिखाने से के बाद अहमदाबाद स्थित एक  जाने-माने गौ संरक्षण संरक्षण केंद्र- वंसी  गिर गौशाला का भ्रमण भी कराया गया जहां पर गिरी नस्ल के पशुओं का अद्भुत प्रबंधन,अनुसंधान एवं विकास दिखाया गया. वंसी  गिर गौशाला में एक व्याख्यानमाला का भी आयोजन किया गया जिसमें गोबर गोमूत्र के प्रयोग पर वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास पर चर्चा की गई और पशु सुरक्षा के से लेकर ऑर्गेनिक फार्मिंग की महत्ता बताई गई.संस्था के संचालक गोपाल सुतरिया ने गोबर  खाद को अधिक उपायोगी बनाने के लिए बैक्टीरियल कल्चर की बात  बताई और कहा कि कि इस कल्चर में 48 प्रकार के जीवाणु है जो की खेती में बेहद फायदेमंद है।उन्होंने इस कल्चर कोनमूने के रूप में सभी प्रशिक्षुओं को नि:शुल्क उपलब्ध कराने की घोषणा की.

इस भ्रमण प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान  जीव संरक्षण केंद्रों की प्रशिक्षणार्थियों ने बहुत कुछ देखा और सीखा. किंतु इसमें सबसे  अधिक आकर्षित करने वाली संस्था रही है जलाराम गौशाला  क्योंकि जलाराम गौशाला की एक इकाई  पूर्णतया पशु अस्पताल है और वहां पर तकरीबन 1,200 बीमार पशुओं की  बेहतरीन देख-भाल की जाती है. सबसे रोचक बात यह है कि इस गौशाला में कुल 7  विभिन्न प्रकार के वार्ड बनाए गए हैं जहां पर अलग-अलग बीमारी के पशुओं की चिकित्सा की जाती है और फिर उन्हें सामान्य  हो जाने पर गौशाला में स्थानांतरित कर दिया जाता है.जलाराम गौशाला -अस्पताल के प्रभारी डॉ. के. पी. पंचाल ने बताया कि  वर्ष 1999 में स्थापित इस केंद्र पर पशुओं की रक्षा के लिए 20 एंबुलेंस रात -दिन चलते हैं और सालाना ₹15 करोड़ खर्च होता है. उन्होंने यह भी बताया कि तकरीबन 180 अंधे, 225 प्रोलेप्स , 190 और हॉर्न कैंसर,170 हड्डी की परेशानियों से पीड़ित पशु भर्ती है और 360 पशु विभिन्न संक्रामक बीमारियों से प्रभावित है जिनकी निरंतर पशुओं की सेवा की जा रही है.रोचक बात यह है कि इस अस्पताल में तकरीबन दो दर्जन स्वयंसेवी पशु चिकित्सक  दिन-रात अपनी सेवाएं दे रहे हैं.  

इस अवसर पर फलोदी के युवा पशु प्रेमी रविंद्र जैन ने बताया कि समस्त महाजन के कई प्रयोग किए गए है जहां निरंतर सफलता की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. अब तक राजस्थान के कुल 13 गांव में तैनात की गई जेसीबी मशीन से तालाबों की मरम्मत एवं खुदाई की गई थी जिसका नतीजा है कि आज सारे तालाबों में तकरीबन 8 से 9 फुट गहरा पानी भर गया जिसे किसी भी भावी विषम परिस्थिति में प्रयोग किया जा सकता है और पशुओं को तड़प-तड़प कर मरने से बचाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि तालाबों के पुनरुद्धार का कार्य सबसे पहले फलोदी से आरंभ किया गया और इस कार्य में समस्त महाजन ने 3 जेसीबी उपलब्ध कराया जिनकी संख्या बाद में बढ़ा दी गई थी.समस्त महाजन के पद्धति के अनुसार जेसीबी पर होने वाले डीजल खर्च गौशालाओं के माध्यम से किया गया. रविंद्र जैन के अनुसार आज हर तालाब में 8 से 9 फुट गहरा पानी उपलब्ध है जिससे तकरीबन 8 से 10 महीने तक का पानी की जरूरत पूरी की जा सकती है. रविंद्र जैन ने यह भी बताया कि इस साल तालाब के किनारे कुल 165 पौधे लगाए गए जो बेहद हरे भरे हो गए हैं जबकि पहले इनके जगह पर अंग्रेजी बबूल लगे हुए थे.

समस्त महाजन के  मैनेजिंग ट्रस्टी शाह ने  बताया कि प्रशिक्षण के आखिरी दिन  सभी प्रशिक्षणार्थियों को गुजरात के चर्चित धर्मज   गांव का भी भ्रमण कराया गया और चारा उत्पादन की रंपरिक तकनीक से स्वाबलंबन का बेहद उत्कृष्ट नमूना है. धर्मज में किसानों का दुग्ध उत्पादन एवं पशु प्रबंधन बहुत बढ़िया है. बताया जाता है कि गांव में 11 राष्ट्रीयकृत बैंक हैं जिसमें 1,000 करोड़ की फिक्स डिपाजिट  है. अभी तक गांव में कोई चोरी नहीं  हुई और न  ही पुलिस स्टेशन है. पूरा गांव एक आधुनिक शहर है जहां पर बच्चों के खेलने के पार्क और स्विमिंग पुल की भी इंतजाम है. शाह ने बताया कि स्थानीय लोग महज  400 -500 रुपए खर्च करके  बड़े शहर जैसा पारिवारिक भ्रमण का आनंद लेते हैं. बाहर से आए तथा स्थानीय लोग कम से कम खर्च में मनोरंजन करते हैं. अपनी उपलब्धियों की वजह से आज धर्म गांव का नाम गिनीज बुक में रिकॉर्ड हो गया है.यही कारण है कि इस गांव को लोग दूर-दूर से भी देखने आते हैं. उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि जब धर्मज गांव आज  चारा विकास एवं पशुधन प्रबंधन  के दिशा में विश्व का एक आकर्षण केंद्र हो सकता है-तो  हमारी गौशालाए क्यों नहीं. 

संस्था के ट्रस्टी देवेंद्र जैन ने बताया कि आज  प्रशिक्षण कार्यक्रम में शरीक सभी  गौशाला प्रतिनिधियों को खाली हाथ नहीं जाने दिया गया और उन्हें  10 हजार से 20 हजार  रुपए का  चेक   प्रोत्साहन स्वरूप दिया गया ताकि वह अगले प्रशिक्षण में  जब दोबारा शामिल हो ताकि समस्त महाजन के स्वावलंबन अभियान में  अपनी प्रगति की बातें बता सके. इस अवसर पर  गोवंश बचाने के लिए  बीएसएफ के शहीद जवान संजय साधू  के परिवार को 50 हजार की सहायता राशि प्रदान की गई. साथ ही साथ सिणधरी आश्रम के मठाधीश रघुनाथ स्वामी को पशु प्राण रक्षा  एवं भरण पोषण हेतु  और अजीत सेवा ट्रस्ट वापी गुजरात द्वारा बकरीद के अवसर पर अवैधानिक तौर पर कुर्बानी के लिए जा रहे पशुओं को बचाने  के लिए भी पांच-पांच  लाख का चेक दिया गया.

समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी शाह ने बताया कि  राजस्थान में जब किसान पशु की देख भाल नहीं कर पाते  तो तिलक लगाकर उन्हें छोड़ देते हैं.उन्होंने कहा कि साधन हीन व्यवस्था और मजबूरी के इस  दयनीय स्थिति से लोगों को बचना चाहिए और  अपने पशुओ  की प्राण रक्षा के लिए आगे आना चाहिए.  उन्होंने बताया कि दीपावली के आस-पास राजस्थान में प्रवासी संत सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा  जिसमें पूरे देश से आध्यात्मिक और बौद्धिक व्यक्तित्व के लोग शिरकत करेंगे. इस आयोजन  में अधिक से अधिक गौ सेवक एवं पशु प्रेमियों को शामिल होने का अपील किया और कहा कि आयोजन के तिथि की घोषणा शीघ्र की जाएगी.


*******

Thursday, July 4, 2019

देश में छुट्टा पशुओं से निजात पाने के लिए "कामधेनु वन्य बिहार" बनेगा:डॉक्टर बल्लभभाई कथीरिया


गोवंश  संरक्षण पर 6 जुलाई को संगोष्ठी आयोजित की जाएगी

4 जुलाई 2019; नई दिल्ली

देश में छुट्टा गोवंश की समस्या समूचे देश के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है. सभी सरकारें अपने अपने ढंग से इस समस्या से निपटने की कवायत करती हैं  किंतु  समस्या जस की तस रह जाती है. भाजपा सरकार इस दिशा में तमाम नीतियों एवं कार्यक्रमों को लेकर  दृढ़ संकल्पित है . राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के चेयरमैन डॉक्टर बल्लभभाई कथीरिया  ने बताया कि 6 जुलाई को  केंद्रीय  मंत्री पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्री, डॉक्टर संजीव कुमार बालयान के संसदीय क्षेत्र में एक   संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है  जिसमें छुट्टा गोवंश /मवेशियों के समस्या एवं समाधान पर विचार किया जाएगा और उसी अनुसार  कदम उठाया जाएगा। 

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग अध्यक्ष  के साथ इस विषय पर डॉक्टर संजीव कुमार बालयान  के निवास पर एक महत्वपूर्ण मीटिंग हुई. जिसमें भारत में देसी गायों के उत्थान हेतु बहुत से मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई. गैरतलब है डॉक्टर संजीव बालयान स्वयं पशु चिकित्सा में डॉक्टरेट है. इसलिए  इस विषय में जितनी  उनकी गहरी पैठ हैं उतने ही गंभीरता  वह  पशुओं से संबंधित  विषयों में रुचि रखते हैं. इस बैठक में वर्तमान में देसी गायों के संरक्षण- संवर्धन एवं विकास के लिए भविष्य में क्या रणनीति बने, इस विषय पर भी मंथन हुआ.

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के सलाहकार  डॉक्टर  के.पी. सिंह भदोरिया ने बताया कि  इस संगोष्ठी में  पशु-प्रेमियों, गौशाला प्रतिनिधियों, किसानों, वैज्ञानिकों  एवं अन्य संबंधित क्षेत्र के लोगों को आमंत्रित किया गया है जिसमें देशी गोवंशीय पशुओं के  रहन-सहन की स्थिति, खेती में पशुओं का महत्व, पारंपरिक खेती के तरीके से लेकर  गोवंशीय पशुओं के  वर्तमान हालात की चर्चा की जाएगी.  उन्होंने स्पष्ट करते हुए बताया कि

देश में इस समय सबसे बड़ा मुद्दा छुट्टा गोवंशीय  पशुओं की है जो दिन प्रतिदिन उलझता जा रहा है. इस विषय पर परिचर्चा के लिए कामधेनु आयोग से संबंधित तमाम विशेषज्ञ वैज्ञानिक इस संगोष्ठी में शामिल होंगे  जिसमें छुट्टा गोवंशीय पशुओं से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण मुद्दा कम लागत में छुट्टा पशुओं से निजात पाने की बात की जाएगी.

डॉक्टर भदोरिया ने भी कहा के कामधेनु आयोग इस समय "कामधेनु वन्य विहार" नामक एक परियोजना को लांच करने जा रहा है जिस पर काफी काम हो चुका है. इस परियोजना को जल्दी ही क्रियान्वित करने की योजना है. राष्ट्रीय कामधेनु आयोग  गोवंश की दशा सुधारने के लिए प्रतिपल संकल्पित है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कुदरती ढंग से कम खर्च में  स्वस्थ एवं अधिक उत्पादन प्राप्त हो सके . 

*******

Thursday, June 27, 2019

"यूनाइटेड नेशन योगा दिवस" के आयोजन में सम्मिलित हुए गिरीश जे. शाह

लखनऊ में जीव जंतु कल्याण पर जुलाई में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा

*************************
27 ,जून 2019 ; मुंबई (महाराष्ट्र)

भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य एवं प्रख्यात जीव दया एवं पर्यावरण संरक्षण में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजी गई संस्था -"समस्त महाजन" के संस्थापक, गिरीश जे. शाह अमेरिका की यात्रा कर स्वदेश वापस आ गए हैं.अपनी यात्रा का विवरण बताते हुए उन्होंने अवगत कराया कि अमेरिका स्थित जीव दया पर समर्पित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं कार्यकर्ताओं को संबोधित किया .भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों को भारत की वर्तमान जीव दया एवं पशु कल्याण के क्रियाकलापों तथा आंदोलन के बारे में अवगत कराया.शाह ने महाराष्ट्र,गुजरात एवं राजस्थान के सूखा पीड़ित क्षेत्रों के पशुओं की प्राण रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी और कहा कि इस समय भारत का पशु कल्याण आंदोलन पूरे दुनिया को सीख देने वाला है जिसका लोगों को अनुसरण करना चाहिए.उन्होंने बताया कि जन जागृति पर आधारित जीव जंतु कल्याण का एक प्रशिक्षण शिविर उत्तर प्रदेश राजधानी लखनऊ के विभिन्न जनपदों से चयनित प्रशिक्षणार्थियों मैं आयोजित किया जाएगा जहां वह उपस्थित पशु प्रेमियों के साथ अपने अनुभवों  को साझा  करेंगे.

जीव दया के विषय में समर्पित समस्त महाजन संस्था के संस्थापक-मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश जे. शाह ने अपने यात्रा का अनुभव बताया और कहा कि अमेरिका जैसे विकसित देशों में जीव दया के कार्यों अत्यधिक समझने की जरूरत है क्योंकि वहां मांस भक्षण की प्रभावी व्यवस्था होने से अतिसघन पशुपालन कार्य करना और कुदरती पशुपालन व्यवस्था से दूर होना उनकी एक मजबूरी रही है जो धीरे- धीरे आज पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहा है जिसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य एवं चिंतन-मनन से यार सोच लेकर पूरी दिनचर्या और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है.इस परिपेक्ष में उनकी मुलाकात कैलिफोर्निया (अमेरिका) स्थित "जैन सेंटर"के चेयरमैन-बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के साथ मीटिंग हुई जिसमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्याप्त जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण संरक्षण से लेकर जीव दया के मुद्दे पर चर्चा हुई जिसमें जीव दया को पूरे विश्व में प्रचारित करने की रणनीतियों पर भी बात-चीत की गई.

उन्होंने सबसे रोचक कार्यक्रम का हवाला देते हुए बताया कि वह इस यात्रा के दौरान "यूनाइटेड नेशन योगा दिवस" के आयोजन में भी सम्मिलित हुए तथा विश्व भर के सबसे लोकप्रिय संवाद-सूचना माध्यम "गूगल के हेड-ऑफिस भी गए ,जहां पर एक ही कैंपस में 50 हजार से अधिक कर्मचारी एक छत के नीचे काम करते हैं. शाहअन्य  कई महत्वपूर्ण दफ्तरों में गए  जहां भारत के  वैज्ञानिक- तकनीकी विशेषज्ञ काम करते हैं और प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रूप में जीव दया से जुड़े हुए हैं.उन्होंने कई  जीव दया प्रेमियों से मुलाकात की जो टि्वटर,फेस-बुक,ईमेल और व्हाट्सएप से समस्त महाजन के साथ अपना संपर्क बनाए हुए हैं.उन्होंने जीव दया प्रचार-प्रसार पर अगली कार्यवाही की चर्चा करते हुए कहा कि जुलाई माह में जीव जंतु कल्याण पर एक दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा जिसमें प्रशिक्षित पशु-प्रेमियों को राष्ट्रीय पशु कल्याण कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा तथा उल्लेखनीय कार्य करने वाले पशु प्रेमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा.

अपनी यात्रा में "आई-फोन" के कार्यालय से लेकर "एंड्राइड" लॉन्च-ऑफिस,"फेसबुक" हेडक्वार्टर एवं "जेसीके लॉस वेगस"  भी  भ्रमण किया और सभी से जीव दया के भारतीय आंदोलन में शामिल होने के लिए अनुरोध किया.शाह ने देश भर के समस्त पशु प्रेमियों से आग्रह किया है कि वह समस्त महाजन द्वारा चलाए जा रहे राजस्थान, महाराष्ट्र एवं गुजरात के अकाल ग्रस्त कार्यक्रम में शरीक हो कर पशुओं के जीवन  रक्षा में सहयोग करें.इस विषय में अधिक जानकारी के लिए संपर्क सूत्र: +91-9825129111/8789859008.

******

Tuesday, June 18, 2019

तमिलनाडु में एक चैरिटेबल ट्रस्ट ने ग्रामीणों के लिए पशु अस्पताल खोला


बेसहारा पशु, ग्रामीण पशुपालक, पशु प्रेमी और और किसान लाभान्वित होंगे: डॉक्टर ओ.पी. चौधरी

19 जून, 2019; चेन्नई (तमिलनाडु)

देश में पशु चिकित्सक और पशु अस्पताल पालतू और बेसहारा जानवरों की उचित देखभाल और उनके रख-रखाव के लिए विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) पशु शरण स्थल आधारित पशु चिकित्सा केंद्रों को स्थापित करने के लिए  पशु सेवा में लीन  संस्थाओं को सहायता करने एवं प्रोत्साहन का कार्य कर रहा है। वर्ष 2019 के दौरान, बोर्ड पशु कल्याण संगठनों को दूर-दराज और ग्रामीण इलाको में पशु चिकित्सा केंद्रों को स्थापित करने के लिए प्रेरित करने में सफल रहा है। इस श्रृंखला में हरियाणा राज्य के बाद, तमिलनाडु  अब दूसरा राज्य है जहां बोर्ड  द्वारा मान्यता प्रदत्त एक  पशु कल्याण संगठन ने पशु अस्पताल  खुलवाया है, जिसमें बेसहारा, घायल ,अपाहिज, बूढे  और असमर्थ जानवरों की  पशु चिकित्सा सेवा  मुहैया कराई जाएगी। इस अस्पताल का शुभारंभ भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव द्वारा किया गया है। बोर्ड अध्यक्ष, डॉ. ओ.पी. चौधरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में पशु अस्पतालों की स्थापना से पशुओं के स्वास्थ्य का लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ  को देख कर अन्य पशु कल्याण कार्यकर्ताओं और पशु कल्याण संगठनों को प्रेरणा
मिलेगी ।

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव (एनएलएम और एडब्ल्यू),डॉ. ओ.पी. चौधरी  जो वर्तमान में भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं,ने कहा कि  "जीवकरुण्य पशु कल्याण धर्मार्थ ट्रस्ट - पशु अस्पताल और बचाव केंद्र" नाम की तमिलनाडु में पशु कल्याण संस्था बेसहारा एवं निराश्रित  पशु पक्षियों के लिए अच्छा कार्य कर रहा है। इस अस्पताल से स्थानीय पशुओं की बेहतर सेवा हो सकेगी। साथ ही अस्पताल  के बेहतरीन सेवा से पशु कल्याण गतिविधियों  में इजाफा होगा  जो पशुओं पर होने वाले अत्याचार को रोकने में नितांत सहायक होगा।  डॉक्टर चौधरी ने कहा कि  उनको बहुत बड़ी उम्मीद है  के तमिलनाडु  के कन्याकुमारी  जनपद में स्थापित यह ग्रामीण अस्पताल निस्वार्थ भाव से पशुओं की बेहतर सेवा कर उनकी जान बचाने के लिए हर पल समर्पित रहेगी। अस्पताल की स्थापना की सफलता  में निश्चित रूप से  वहां के  दयावान  और अत्यंत सहयोगी प्रवृत्ति के  लोगों का  बहुत बड़ा हाथ है। वहां के लोगों की भावना का  प्रभाव पूरे देश में जाएगा और लोगों को जागरूक करेगा जिससे जानवरों पर क्रूरता को रोकने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बोर्ड  सभी पशु कल्याण संगठनों और गोशालाओं को  पशु शरण स्थल आधारित पशु चिकित्सालय स्थापित कर  निराश्रित पशु जैसे मवेशी, कुत्ते, बिल्ली और अन्य जानवरों की देखभाल और प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। बोर्ड  का  हमेशा प्रयास रहा है कि  पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) कार्यक्रम संचालित कर  कैनाइन  प्रजाति के पशुओं की आबादी नियंत्रण किया जाना अत्यंत आवश्यक है जिसके लिए बोर्ड निरंतर कटिबद्ध है।  इस दिशा में छुट्टा पशुओं( कुत्तों) के जनसंख्या नियंत्रण  तथा  रेबीज-रोधी कार्यक्रम के  सफल संचालन, पशुओं के रेस्क्यू कार्यों को करने के लिए बोर्ड संस्थाओं को एम्बुलेंस सुविधाएं प्रदान करता है।

इस परिपेक्ष में  बोर्ड सचिव डॉक्टर नीलम बाला ने तमिलनाडु के नागरकोइल जिले के स्थानीय लोगों और ग्रामीणों की सराहना  किया और कहा कि इस तरह की स्थापना के सफलता के पीछे  नागरकोइल के  लोगों की प्रशंसा की जानी चाहिए क्योंकि बिना उनके सहयोग और समर्थन के इतना बड़ा कार्य नहीं किया जा सकता है। उसने कहा कि "जीवकारुन्या  एनिमल वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट - एनिमल एंड रेस्क्यू सेंटर" वास्तव में जैसा नाम "जीवकारुन्या"  उसी तरह का कार्य सुनिश्चित किया है। बेशक इसका असर  पड़ेगा  और संस्था सभी जीवों के प्रति दया या करुणा को वहां के  लोगो में प्रसारित करने में सफल होगी। बोर्ड इस तरह से समर्पित संस्थाओं को अभी प्रेरित कर रहा है  और देश भर की संस्थाओं को पशु शरण स्थल आधारित पशु चिकित्सालय स्थापित करने के लिए आवाहन करता है। सचिव ने बताया कि इस तरह के काम करने वाले लोगों को बोर्ड हमेशा उत्साहित करता रहा है और आज भी।  यही कारण है कि बोर्ड पशु कल्याण के सही मार्ग  पर चलने  वाले संस्थाओं के लिए  आज आगे आया है। सचिव ने  संस्था के संस्थापक के उद्देश्यों  की सराहना की और कहा कि इस अस्पताल की संस्थापक,  डॉक्टर वसंता लक्ष्मी रवि कुमार  सभी जानवरों के प्रति अत्यंत दयावान है  जिसका नतीजा है कि आज यह पशु अस्पताल हमारे सामने है। सचिव ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को याद दिलाते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों में पशु की क्रूरता को रोकने के लिए (पीसीए) अधिनियम, 1960 के प्रावधानों का उल्लेख किया है जिसमें उनके"पांच प्रकार कीअधिकारो" के मानदंडों  का विवरण है।साथ- साथ  यह कहा  कि नियमानुसार पशु कल्याण मानदंडों को लागू कर जानवरों पर  होने वाले क्रूरता तथा अपराध को रोकने का कार्य कर उनकी देखभाल करके सभी कल्याण कार्यक्रम चलाए जाएं ।

बोर्ड के अध्यक्ष के इस यात्रा के दौरान  कन्याकुमारी जिला प्रशासन से पशु कल्याण के उपायों और  संबंधित नियमों के क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए  कार्य करने के लिए प्रेरित किया ।  जिला प्रशासन ने इस संबंध में संबंधित विभागों की एक समीक्षा बैठक  भी आयोजित की। बोर्ड अध्यक्ष ने जिला प्रशासन को  यह भी निर्देश दिया कि नियमों के अनुसार एसपीसीए, कन्याकुमारी के कार्यान्वन के लिए उचित ध्यान दें।   कन्याकुमारी के जिला जिलाधिकारी, प्रशांत एम. वडनेरे ने  एसपीसीए अर्थात सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूलेटरी टू एनिमल्स के उचित कामकाज के लिए आश्वासन दिया।

********

RURAL ANIMAL WELFARE WORKERS AND FARMERS WILL BE BENEFITED:DR.O.P.CHAUDHARY

Tamilnadu Based  Charitable Trust  Opened Animal Hospital  for Villagers

19th June,2019 ; Chennai (Tamilnadu)

Veterinarians and animal hospital  in the country  is suffering from various challenges  for the proper care and management of  domesticated and  stray animals. The Animal welfare Board of India (AWBI) encourages  and provides support to set up animal Care Centres . During the year 2019 , the Board  has succeed to motivate  animal welfare organisations to setup veterinary hospitals  in  remote and rural areas .In this series , after  Haryana , Tamilnadu is the  Second State  where  rural veterinary hospital is  opened  by AWBI recognized animal welfare organization for the service of homeless animals. This hospital is  inaugurated by the Chairman of the Animal Welfare Board of India  and it's  Secretary.

The AWBI Chairman , Dr. O.P. Chaudhary  said that  the establishment of the veterinary hospitals in rural area  will boost the the animal health and farmers productivity.  Such activities will inspire the  other animal welfare activists and animal welfare organisations too.


Dr. O.P. Chaudhary, Joint Secretary(NLM & AW), Ministry of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying , Government of India  said that this organisation- "Jeevakarunya Animal Welfare Charitable Trust - Animal Hospital and Rescue Centre" is doing tremendous work for homeless ,uncared animal and this hospital will be helpful in terms of animal welfare activities in the time to come.He hoped for better service and activities of  animal welfare will be carried out in selfless manner to save their life. He said that these activities  will certainly will make more  aware the public  to be more kind and compassionate  which will help to prevent the cruelty on animals. He also said taht the AWBI provides financial support to animal welfare organisations and goshalas for construction of shelters,  care and management of stray animals  like cattle , dogs , cats  and other animals.The  Board also supports Animal Birth Control(ABC) Programme for canines towards population control of  stray animals. For care of  animal health and rescue operations , the Board provides ambulance  facilities.

Appreciating the local people and villagers of the Nagarcoil district of Tamilnadu, Dr. Neelam Bala, Secretary of the Board  said that  without the cooperation and support such kind of establishment cannot be done. She said that   "Jeevakarunya Animal Welfare Charitable Trust - Animal Hospital and Rescue Centre" is  truly named "Jeevakarunya" which defines its virtues - the kindness or  compassion to all the living creatures. The Board supports all the  animal welfare organisations throughout country.The Board has come  forward to support organisations  working in this manner and follow the right path of animal welfare.

She has appreciated  the aims and objectives of  Dr.T. Vasantha Lakshmi Ravi Kumar, Chairperson of the Hospital and said that  this Hospital is established due to her nature of kindness  and compassion to all animals. Secretary has recalled  the directions of the Supreme Court of India wherein mentioned the  provisions of the Prevention of Cruelty to Animals(PCA) Act 1960  to prevent the  cruelities on animals  by implementing the animal welfare norms  stated  under criteria of the " Five Freedom" of animal welfare for their care and concern.

During the visit of the Chairperson of the  Board ,  the district administration  arranged a meeting of the departments concerned  to ensure the the implementation of the  animal welfare measures  and the rules. The Chairman AWBI  directed the district administration to pay the proper attention  for the functioning of the SPCA , Kanyakumari  as per rules and District Magistrate, Shri Prashant M. Wadnere assured for proper functioning of Society for Prevention of Crulety to Animals.

******

Monday, June 17, 2019

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के चेयरमैन ने 127वीं बार रक्तदान किया

देश में रक्तदान की जागरूकता आवश्यक:डॉ.बल्लभभाई कथीरिया


17  जून , 2019  ; नई दिल्ली : वर्ल्ड ब्लड डोनर डे 2019 के उपलक्ष्य में राजकोट सिविल हॉस्पिटल पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज में, इंडियन मेडिकल एसोशिएशन के तत्वाधान में दर्दी नारायण-दरिद्र नारायण और थैलेसेमिया पीड़ित बच्चों के लाभार्थ हुई 'रकतदान शिबिर' में अपने जीवन का 127 वा रक्तदान किया . देश के अग्रणीय रक्तदाता, भारत सरकार के राष्ट्रीय कामधेनु आयोग क़े चेरमेन ,पूर्व केंद्रीय मंत्री ,  डॉ. वल्लभभाई कथीरिया ने 'विश्व रक्तदाता दिन' के उपलक्ष्य में इंडियन मेडिकल एसोशिएशन के तत्वाधान में राजकोट सिविल हॉस्पिटल में पंडित दीन दयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज में  बेसहारा और थैलेसेमिया पीड़ित बच्चों के लिए आयोजित 'रकतदान शिबिर' में शामिल होकर अपने जीवन का 127वा रक्तदान किया.उन्होंने बताया कि बच्चे के जन्म के समय महिलाओं,थैलेसीमिया,एनीमिया,लंबी अवधि के ऑपरेशन तथा एक्सीडेंटल ऑपरेशनमैं रक्तदान से लोगों काजीवन बचाया जा सकता है.

डॉ.कथीरिया ने अपने जीवन का प्रथम रक्तदान एमजी साइंस कॉलेज के एनसीसी केडेट्स द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में रक्तदान किया.डॉ. कथीरिया बताया कि रक्तदान करना बहुत ही सरल,सहज है और सिर्फ मिनिट्स में ही आप अपना पूर्ववर्त रूटीन शुरू कर सकते है और रक्तदान करना  स्वास्थय के लिए भी उत्तम है. साथ -साथ रक्तदान से मौत से जूझ रहे किसी इंसान की जिंदगी बचाई जा सकती है.कोई भी 18 से 60 वर्ष का व्यक्ति रक्तदान कर सकता है.उन्होंने बताया किएक सामान्य मनुष्य केशरीर में 78 लीटर ब्लड होता हैजिसमें से380 मिलीलीटररक्त का दान करने में कोई नुकसान नहीं है.हम जब रक्तदान करते हैं तो उसके बाद तक घंटे भीतर ट्रिनिटीज के जरिए रिजर्व रक्त से कमी की भरपाई हो जाती है.इसलिए रक्तदान से किसी प्रकार की शरीर में कमजोरी नहीं आती है. डॉ.कथीरिया ने बताया कि भारत में जागरूकता का अभाव होने की वजह सेप्रति 1000 व्यक्तियों में कोई 7 लोग रक्तदान करते हैं जब कि विकसित देशों मेंप्रति 1000 व्यक्तियों में 60 से 70 लोग रक्तदान करते हैं.

डॉ. कथीरिया ने बताया कि रक्तदान यात्रा का शुभारंभ तू पहले से चल रहा था किंतु जब वह 11वे रक्तदान के बाद तत्कालीन राज्यपाल द्वारा सम्मानित किए गए तो उससे उन्हें काफी प्रोत्साहन मिला मिला.बतौर सर्जन , जब वह डॉ. वी. जी. मावलंकर जैसे प्रख्यात लोगों के साथ कार्य करते हुए जीवन रक्षा के अनेक चुनौतियों का सामना कर जीवन रक्षा करने का संतोष प्राप्त कियाउसे से जीवन में निरंतर रक्तदान जारी रखने कासंकल्प लिया. शुरू में शतक का लक्ष्य रखा जो वर्ष 22002 मैं पूरा हो गया.फिर मन की शक्ति फिर से मजबूत हुई और इस पावन पथ को सार्वजनिक स्वरूप देते हुए रक्तदान महोत्सव में शामिल होते चले गए .यह कारवां चलता गया और हम आगे बढ़ते गए.राज्यपाल सुंदरसिंह भण्डारी जी के विशेष प्रेरणा से इस अभियान के शुरुआत में महज 1000 रक्तदाताओं का लक्ष्य रखा गया  था लेकिन रक्त दाताओं के अपार उत्साह से यह आंकड़ा 7644 पर जा पहुंचा. यहां तक स्थिति आ गई कि ब्लड बैंक की क्षमता पूर्ण हो जाने के कारण तकरीबन 3000  लोगों को वापस जाना पड़ा.

मुझे वह समय याद है जब मेरे व्यक्तिगत 108वे रक्तदान के समय मेरे दिल्ली के मित्रों ने यह पावन आयोजन अक्षरधाम मंदिर में किया जहां योगगुरु बाबा रामदेव के साथ 2775 रक्त दाताओं नेअपना योगदान दिया.इसी प्रकार मेरे 125वा रक्तदान राजकोट में और 126वा रक्तदान स्वामीनारायण धर्मोत्सव में किया.उन्होंने कहा कि मैं आज बहुत खुश हूं जब इस सालआयोजित होने वाले विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर इंडियन मेडिकल एससोसिएशन द्वारा आयोजित रक्तदान केम्प में 127वा रक्तदान का भी लक्ष्य पूरा किया. डॉ. कथीरिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि

अभी तक के सार्वजनिक जीवन दौरान हज़ारो रक्तदाताओ को प्रोत्साहित करने ,सैकड़ों रक्तदान केम्प आयोजित करने -करवाने तथा अनगिनत  ब्लड बैंको की स्थापना करवाने का ईश्वर ने मौका प्रदान किया जिसे  डॉ. कथीरिया अपने जीवन की एक बहुत बड़ी मानव सेवा की सफलता मानते है.

*********

Sunday, June 9, 2019

लखनऊ शहर में घोड़ा गाड़ी चालकों के लिए जांच अभियान - दोषी चालकों को हिदायत - चाबुक छीने गए

9 जून 2019 ; लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

इस वर्ष गर्मी की मार इतनी तेज है कि  समूचे देश में पशु -पक्षियों की हालात बहुत खराब है।  राजस्थान, महाराष्ट्र तथा गुजरात जैसे तमाम राज्यों में अकाल की भयावह स्थिति बनी हुई है।  हर गांव से प्रतिदिन चारे -पानी के अभाव में पशुओं की मरने की खबर एक आम बात हो गई है। कई राज्यों में जीव जंतु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के अंतर्गत उल्लेखित उपायों के तहत चिलचिलाती गर्मी में पशुओं से काम लेना एक अपराध है और इस बात को नजर रखते हुए कई राज्यों में राज्य प्रशासन या जिला प्रशासन/जिलाधिकारी  ने चिलचिलाती धूप में पशुओं से काम लेने पर प्रतिबंध लगाया है।साथ ही साथ  पशुओं के उपयोग का समय निर्धारित किया गया है और उनके लिए चारा- दाना प्रबंधन की व्यवस्था का भी आदेश दिया है।  इसी क्रम में  उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सोसायटी फ़ार  एनिमल वेलफेयर, लखनऊ कड़ी धूप में  घोडा गाड़ी चालकों  से  जबरदस्ती काम लेने से रोकने के लिए  जांच अभियान चलाया है।

आज दोपहर में  सोसाइटी फॉर एनिमल वेलफेयर  की अध्यक्षा सबा बानो जो भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड की लखनऊ जनपद की मानद जिला जीव जंतु कल्याण अधिकारी भी हैं , ने  घोड़ों के ऊपर  होने अत्याचार को रोकने के लिए "घोड़ा अभियान" चलाए जाने की जानकारी दी। सबा ने बताया कि दुबग्गा रोड, ठाकुरगंज और टीवी टावर के पास   दोपहर 12 बजे से  2 बजे तक  घोड़ा गाड़ी  चालकों की जांच- पड़ताल की गई। इस अभियान के तहत आज मात्र 2 घोड़ा गाड़ी दिखी जिसमें से एक घोड़ा गाड़ी खाली थी और दूसरी ओवरलोड  पाई गई।  जांच के दौरान यह पाया गया कि दोनों  घोड़ा गाड़ियों के चालकों के पास -चारा पानी नहीं था। सोसायटी फॉर एनिमल वेलफेयर की ओर से घोड़ा गाड़ी चालक को कड़ी हिदायत दी गई और कहा गया कि भविष्य में जीव जंतु क्रूरता निवारण अधिनियम का पालन करें अन्यथा उनके ऊपर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। मोहित और फरहाना  के अनुसार आज घोड़ा अभियान के तहत एक घोड़े का उपचार किया जो जांच के दौरान जख्मी पाया गया।

जांच टीम के प्रदीप कुमार वर्मा ने  बताया कि संस्था ने जहां घोड़ा वाहन चालकों को एक तरफ चेतावनी दी गई वहीं दूसरी ओर  राहगीरों  को भी बताया कि जब कभी भी  ओवरलोडेड गाड़ी दिखाई दे  तो   तुरंत इसकी सूचना पुलिस और उनकी संस्था को दी जानी चाहिए ताकि उस पर सख्त कानूनी कार्यवाही किया जा सके।  रिजवान ने बताया कि अभियान के दौरान ओवरलोड वाली गाड़ियों के चालकों को हिदायत देते हुए उनसे उनकी चाबुक भी ले ली गई। संस्था के  इस अभियान  के बारे में जानकारी देते हुए  एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट मनीष श्रीवास्तव तथा अमित गुप्ता ने बताया कि  घोड़ा अभियान चलाने की वजह से घोड़ा वाहन चालकों की सोच में  काफी फर्क नज़र आ रहा है इसका नतीजा है किइस समय कड़ी दोपहर में  घोड़ा गाड़ियों का संचालन काफी हद तक नियंत्रित हो गया है। अविनाश कुमार ने बताया कि सोसायटी फॉर एनिमल वेलफेयर का यह अभियान अभी इस रूट पर जारी रहेगा क्योंकि यहां से घोड़ा गाड़ियों का अक्सर आना-जाना बना रहता है।

सोसाइटी फॉर एनिमल वेलफेयर आज के इस अभियान में मनीष श्रीवास्तव, अमित गुप्ता,  अवनीश कुमार, मोहसिन सिद्दीकी,  फरहाना मलिकी, रिजवान मलिकी, प्रदीप कुमार वर्मा और शबा बानों  बानो सहित कई स्थानीय पशु प्रेमी भी शामिल थे।

********************

प्रख्यात कथा वाचक रमेश भाई ओझा से राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष की एक अंतरंग मुलाक़ात


9 अप्रैल , 2019 , अहमदाबा द( गुजरात)

 जाने- माने वेदांत स्कॉलर ,आध्यात्मिक गुरु, प्रखर वक्ता  एवं प्रख्यात  कथा वाचक   रमेश भाई ओझा ने पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री,डॉ. वल्लभभाई कथीरिया को राष्ट्रीय कामधेनु आयोग का  अध्यक्ष बनने पर  आज शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया ।


डॉ. वल्लभभाई कथीरिया और रमेश भाई के बीच गौ संरक्षण एवं संवर्धन के कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे की बात  हुई। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष ने  राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के बारे में परिचय दिया और भारत के  प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी के गौ संरक्षण-संवर्धन संबंधी सपने को साकार करने की चर्चा की  ।

*********************

Friday, June 7, 2019

गौ संवर्धन से पर्यावरण संरक्षण में हाथ बटाइए :डॉ. वल्लभभाई कथिरिया



रिपोर्ट : डॉक्टर आर. बी. चौधरी
( विज्ञान लेखक एवं पत्रकार ; पूर्व मीडिया हेड एवं प्रधान संपादक- 
भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड, ,भारत सरकार)
************************
 4 जून 2019, नई दिल्ली

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के चेयरमैन पूर्व सांसद एवं केंद्रीय मंत्री डॉ वल्लभभाई कथिरिया पर्यावरण संरक्षण के आंदोलन में गौ संवर्धन का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का एक नया आयाम जोड़ दिया है। डॉक्टर कथिरिया विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर पशु प्रेमियों को संबोधित करते हुए कहां की आम तौर पर, हम नए पेड़ों के रोपण और पेड़ों के पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी वार्तालाप जैसी गतिविधियों से संतुष्ट रहते हैं, लेकिन वास्तव में, पर्यावरण संरक्षण का अर्थ है भूमि, जल, वन्य जीवन, जंगलों और हर जीव की सुरक्षा! इस संदर्भ में, भूमि, जल, वन्यजीवों, वनों और प्रत्येक जीवित प्राणी की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान गौमाता का है। इसीलिए गाय को "मातर :सर्वभूतानां गावः सर्व सुखप्रदाः" कहा जाता है। आइए ,हम पर्यावरण की सुरक्षा में गौमाता के विशेष महत्व को समझे।


 जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण की निरंतर बढ़ती चुनौतियों पर जोर देते हुए डॉक्टर कथिरिया ने कहा कि आज पूरी दुनिया लगातार भय के खतरे में जी रही है। हम सभी जो 21 वीं सदी के दौरान विकास और उपलब्धियों पर गर्व करते हैं लेकिन यह महसूस करते है और भयभीत भी है कि ये विश्वास कितना विनाशकारी हो सकता है । विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास के साथ, विनाश के द्वार भी खोले गए हैं। हमने इस बारे में बहुत कम जानकारी हासिल की है कि बिना ज्यादा समझ के विज्ञान का असीम उपयोग हमें कहां ले जाएगा। पर्यावरणीय उपेक्षा के कारण, पूरी दुनिया उन प्राकृतिक आपदाओं को देख रही है जिनकी कभी कल्पना नहीं की गई थी समझ में ने आनेवाली सभी प्राकृतिक चहलपहल शुरू हो गयी है और ये पूरी दुनिया पर भारी पड रही है ।

उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि भूकंप, सुनामी, तूफान, घातक, सूखा, ठंडी-गर्मी चक्र, हिमखंडों का पिघलना, ओजोन परत में अंतराल, जंगलो में  आग जैसे कई प्राकृतिक विपदा आज आम हो गएं हैं। दूसरी ओर, दुनिया भर के 150 से अधिकतर देशों के बीच लड़ाई चल रही है। आतंकवाद, नक्सलवाद, माओवाद से लेकर पारिवारिक संघर्ष, हत्या, डकैती, चोरी, बलात्कार, जल प्रदूषण, खाद्य अपमिश्रण, मीडिया द्वारा फैलाया जाने वाला मानसिक प्रदूषण, नई बीमारियाँ की वृद्धि, दवाओं और रसायन के दुष्प्रभाव आदि; यह सब हमें "2012" फिल्म में दुनिया के विनाशकारी आघात को दर्शाया गया है, उनकी याद दिलाता है।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के चेयरमैन का मानना है कि वर्ष 2012 बीतने के बाद कई भविष्यवाणियां गलत साबित हो रही हैं। यहां तक ​​कि अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एल गोर ने पर्यावरण असमानताओं की स्थिति को दर्शाते हुए  "द इनकन्वेनिएंट ट्रुथ" पुस्तक लिखी  जबकि आज जब दुनिया विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि क्या दुनिया विनाश की ओर भी तेजी से नहीं बढ़ रही है?
यह कहना शायद जल्दबाजी होगी। लेकिन क्या विनाश की गति तेज होने से पहले जागना जरूरी नहीं है? अन्यथा फिर वहां से लौटने का रास्ता शायद नहीं बचेगा l

उन्होंने महात्मा गांधीजी और उनकी फिलसुफी "सरल जीवन और उच्च विचार" तथा उनके दर्शन को याद दिलाते हुए यह कहा कि एक सभ्य, स्थानीय, प्रकृति-आधारित, आत्मनिर्भर जीवन प्रणाली की ओर मुड़ने का समय आ गया है। भारतीय जीवन शैली में, व्यक्ति के जीवन से लेकर सर्वशक्तिमान तक, हर जीवित प्राणी का कल्याण - "वसुधैव कुटुम्बकम" के अंतर्गत "सर्वजीव हितावह, सर्व मंगलकारी, सर्व कल्याणकारी" - एक आदर्श प्रणाली थी, जिससे उच्च जीवन शैली विकसित हुई। मनुष्यों एक साथ जुड़े हुए थे और उनके पास प्रत्येक जीवित प्राणी और प्रकृति की दूरदर्शिता थी।

 पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर कई महत्वपूर्ण  हिदायतो को  बताते हुए डॉक्टर कथिरिया ने यह भी कहा कि वर्तमान समय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के पूर्ण उपयोग के साथ-साथ धर्म और नैतिक मूल्यों के आधारित आहार और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के संयोजन युक्त इस प्रणाली को फिर से व्यवस्थित करने का समय आ गया है। ‘सुखी जीवन जीने का सबसे अच्छा और बढ़िया तरीक़ा’ - भय विकास के लिए चिंतन और काम करने का समय आ गया है।

डॉक्टर कथिरिया ने बताया कि गाय का दूध अमृत है। उत्तम आहार और स्वास्थ्य के लिए उत्तम। दवाओं पर लाखों रुपये खर्च में कमी आएगी। गाय का दूध मधुमेह, हृदय रोग, लकवा, कैंसर, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं आदि को कम करने में मदद करेगा।  सकारात्मक जीवनशैली में बदलाव से तनाव कम होगा और बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। होभी दवा और रासायनिक दुष्प्रभाव बहुत कम हो जाएंगे, परिणामस्वरूप पर्यावरण की रक्षा। वैज्ञानिक कसौटी पर  खरा पाए जाने वाले कई गो- उत्पादों की  महत्ता बताते हुए डॉक्टर कथिरिया ने बताया कि गाय का घी सबसे श्रेष्ठ और बहुत फायदेमंद है। घी से जलाये गए दिए और हवन से एसीटिलिक एसिड, फॉर्मलाडिहाइड और कई ऐसी गैसों का उत्पादन होता हैं जो पर्यावरण को शुद्ध रखने में उपयोगी हैं, ओजोन परत की रक्षा होती हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को कम करते हैं।

उन्होंने बताया कि गोमूत्र में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, एंटीकैंसर गुण हैं। गोमूत्र का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है और यह कई बीमारियों को ठीक करता है। यह अन्य रसायनों के हानिकारक और खतरनाक प्रभावों को कम करने के साथ-साथ दवाओं के उपयोग को कम करने में मदद करता है। गोमूत्र के छिड़काव से घर के आसपास का वातावरण स्वच्छ रहता है। डेंगू, बर्ड फ़्लू, स्वाइन फ़्लू आदि रोग ऐसे घरों के पास कभी दिखाई नहीं हैं! गोमूत्र जैविक खाद्य पदार्थ  के लिए कीटनाशक के रूप में उपयोगी है। इसके अलावा रासायनिक दवाओं के जहरीले प्रभाव से और मिट्टी की ताकत बढ़ाकर लाखों जीवों की जान बचाता है। चेयरमैन  राष्ट्रीय कामधेनु आयोग रासायनिक उर्वरकों  के  दुष्प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि गाय के गोबर को जैव-उर्वरक के रूप में उपयोग करने से रासायनिक उर्वरक के घातक प्रभावों से बचा जा सकता है। कारखानों से प्रदूषण कम होगा, करोड़ों जीवन स्वस्थ रह सकेंगे, और मिट्टी की नमी पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

पृथ्वी पर  ग्रीन कवर अर्थात हरित पट्टी के निरंतर विनाश पर  तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई पेड़ और वनस्पतियाँ हरी रहेंगी या भूमि पर छिड़के जाने वाले गोमूत्र से हरी हो जाएँगी। सैकड़ों किसान आत्महत्या करना बंद कर देंगे, अरबों रुपये के डीजल के आयात पर रोक लगेगी और परिणामस्वरूप देश के लिए राजस्व की बचत होगी। गोबर राहत देगा और हानिकारक रसायनों को अवशोषित करके लाखों लोगों की जान बचाएगा। इसीलिए हम घर के आंगन को गोबर से कोट करते थे। लाखों रुपये के डीजल की बचत के अलावा, खेती की तकनीक और बैलगाड़ियों पर निर्भर परिवहन से डीजल से धुआं कम होगा और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी। जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि एक गाय के 8 से 10 लीटर गोमूत्र और 8 से 10 किलोग्राम गोबर रोजाना होती है। पूरे देश की ग्रामीण आबादी को बायोगैस और बिजली प्रदान करने की क्षमता रखती है। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू उपयोग की गैस के लिए 7 करोड़ मवेशियों की आवश्यकता है; वाहनों के पेट्रोल-डीजल के लिए 4 करोड़ मवेशी, और बिजली पैदा करने के लिए 8 करोड़ मवेशी; आज, हमारे देश में पहले से ही 22 करोड़ से अधिक मवेशी हैं, अन्य जानवर अलग हैं! इन मवेशियों द्वारा उर्वरक की आवश्यकता को भी पूरा किया जा सकता है। देश की कृषि समृद्ध होगी, गाँव समृद्ध होंगे, देश समृद्ध होगा, और पर्यावरण की रक्षा होगी, तो विश्व बच जाएगा l

डॉक्टर  कथिरिया का विश्वास है कि गौरक्षा (मवेशियों की रक्षा), गोपालन (मवेशियों का पालन) और गौसंवर्धन (मवेशी प्रजनन) सबसे अच्छा पर्यावरण का संरक्षण है। गाय एक मोबाइल फ़ार्मेसी, मोबाइल हेल्थ केयर सेंटर, मोबाइल मंदिर-पूजा स्थल है। गाय का दिव्य सार वातावरण को 15-20 मीटर तक शुद्ध और स्वच्छ रखता है। पर्यावरण की शुद्धता के अलावा, यह मन की शांति और पवित्रता को बढ़ावा देता है और बुरे विचारों, बुरे स्पंदनों को रोकता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि व्यक्ति, परिवार, गाँव, समाज और वैश्विक भाईचारे की भावना के वास्तविक अर्थ को साधार करने का वैज्ञानिक गुण गौमाता में है।

उन्होंने सभी  देशवासियों पशु प्रेमियों  और  गौ संवर्धन में लगे लोगों से अपील किया कि पर्यावरण दिवस' पर सभी को एक साथ हाथ से हाथ मिला कर आगे बढ़ना चाहिए. साथ ही साथ गौसेवा (गौ रक्षा) से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में शामिल हो कर इनकन्वीनियंस टूथ को कन्वीनियंस अनट्रुथ में बदलना चाहिए ताकि हम भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के आधुनिक भारत के सपने को साकार कर सकें ।


************